नाव घेऊ कुणाकुणाचे मी?
सोसतो मीच आजकाल मला
नवे गझललेखन
| शीर्षक | कवी | प्रतिसाद |
|---|---|---|
| लिहायचे ते लिहून टाकू | बेफिकीर | 3 |
| रात्र पुन्हा परीकथा रंगवेल | प्रसाद लिमये | 3 |
| पादुका | मिल्या | 3 |
| केवळ तुझी होऊन झंकारायचे | सोनाली जोशी | 8 |
| ...जमेल तेंव्हा | जयन्ता५२ | 7 |
| मागचे जाती पुढे | अजय अनंत जोशी | 5 |
| गंधीत रात आहे | बेफिकीर | |
| यातूनच माझे दैव सदा घडलेले | बेफिकीर | 3 |
| दुःख गोठलेले मी... ! | प्रदीप कुलकर्णी | 15 |
| ते पाखरू दिवाणे | जयन्ता५२ | 11 |
| अढी कपाळावरील जेव्हा मनात गेली.. | ज्ञानेश. | 11 |
| ----पुन्हा का---- | नेहा | 4 |
| मनाला | क्रान्ति | 6 |
| का हवी असतात तेव्हा नेमकी रुसतात नाती? | बेफिकीर | 1 |
| अलिप्तता | ऋत्विक फाटक | 2 |
| नको फिरून बोलणे नकोच आज भेटणे | सोनाली जोशी | 6 |
| सुखास आता तुझे नाव आहे | जयन्ता५२ | 7 |
| मी मिटून डोळे कविता जागत असतो | चित्तरंजन भट | 23 |
| ...स्मरशील तू ! | प्रदीप कुलकर्णी | 6 |
| मदार | पुलस्ति | 8 |
| असाच विस्कळीत मी | भूषण कटककर | 6 |
| कुर्निसात | केदार पाटणकर | 23 |
| पक्षी येती झाड बहरता , वठल्यावरती कुणी न दिसते | सोनाली जोशी | 7 |
| लोचट आशा, नेक निराशा, एक उसासा जीवन | बेफिकीर | 5 |
| बहुधा | क्रान्ति | 9 |