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एका उन्हाची कैफियत...ऐकण्यासारखी |
केदार पाटणकर |
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माझ्या काळाचा अनुवाद |
विश्वस्त |
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शे(अ)रो-शायरी, भाग-४ : खिलौने नहीं चलते |
मानस६ |
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सहज मनापर्यंत पोहोचलेले.... |
ह बा |
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खरे तर दार वा-याने... |
केदार पाटणकर |
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शे(अ)रो-शायरी, भाग-२: पा-ब-गिल सब है |
मानस६ |
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शेरो-शायरी : प्रस्तावना |
मानस६ |
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शे(अ)रो-शायरी, भाग-३ : तुम्हारे खत में |
मानस६ |
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सुरेश भटांच्या त्या दोन ओळी... |
अजय अनंत जोशी |
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शेरो-शायरी: दर्द मिन्नतकश-ए-दवा न हुआ |
मानस६ |
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हरफनमौला सुरेश |
विश्वस्त |
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गालिब बेनकाब |
बेफिकीर |
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चांदण्याची तोरणे(पुस्तक परिचय) |
केदार पाटणकर |
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गझल तिहाई - वृत्तांत |
बेफिकीर |
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मीर तकी मीर ची एक गझल व त्याचे मराठी... |
हेमंत पुणेकर |
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प्रकाशित करण्याची गझल रसिकासाठी असावी... |
बेफिकीर |
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शांत मी राहू कशी |
विश्वस्त |
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भटसाहेब १ |
विश्वस्त |
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सुरेश भटांच्या गझलांमधील तरल भावकाव्य |
सदानंद डबीर |
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अनंतची गझल |
विश्वस्त |
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समकालीन गझल.... |
अनंत ढवळे |
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मराठी गझल धोक्याच्या वळणावर |
निनावी |
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पेज कॅशे क्लिअर |
विश्वस्त |
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देवनागरीत असे लिहावे! |
निनावी |
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पुलस्ति ह्यांच्या गझला |
विश्वस्त |