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असे बाहेर डोकावू नका आतील दु:खांनो.... |
बेफिकीर |
22 November 2010 |
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आयुष्य गोल आहे |
मिल्या |
7 January 2011 |
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जे कधी न जमले मजला |
सरदेसाई |
23 December 2007 |
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बंडाचा झेंडा कधीच नव्हता हाती! |
क्रान्ति |
2 December 2010 |
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कळा लागल्या |
क्रान्ति |
31 December 2010 |
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अबोला गाजला होता |
मयुरेश साने |
29 December 2010 |
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मी विस्कटल्या खोलीत मनाच्या.. |
बहर |
9 December 2010 |
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हात होतो पुढे भिकार्यांचा |
बेफिकीर |
18 December 2010 |
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सोकावलेल्या अंधाराला इशारा |
गंगाधर मुटे |
29 December 2010 |
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पहा दिशाही रुसून बसल्या तुझ्यासारख्या. |
सोनाली जोशी |
10 November 2010 |
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पाणी थकले, जमीन थकली... |
वैभव देशमुख |
1 October 2010 |
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''सावली'' |
कैलास |
25 December 2010 |
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मिसरे |
क्रान्ति |
10 December 2010 |
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ह्याहून मोठे अक्रीत काही घडणार नाही |
विजय दि. पाटील |
22 December 2010 |
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''वेदना'' |
कैलास |
19 December 2010 |
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जिथे मी पोचलो तेथे तुझे माहेर होते |
बेफिकीर |
15 December 2010 |
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बघ तुझ्या येण्यामधे हे केवढे मांगल्य आहे |
विजय दि. पाटील |
2 December 2010 |
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मी डाव मांडलेला........ |
मनिषा नाईक. |
7 December 2010 |
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प्रकाश स्वप्ने.. |
बहर |
24 November 2010 |
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मोडून यार गेला संसार आज माझा .. |
शाम |
24 November 2010 |
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पुन्हा पुन्हा !! |
supriya.jadhav7 |
4 December 2010 |
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आज भारंभार झाली आसवे !!! |
supriya.jadhav7 |
2 December 2010 |
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वेड तो लावून गेला (गझल) |
मनिषा नाईक. |
16 November 2010 |
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ती जुनी वही दिसली खिळखिळली माझी |
चित्तरंजन भट |
23 August 2010 |
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अजूनही |
आनंदयात्री |
17 November 2010 |