नवे लेखन
| प्रकार | शीर्षक |
|---|---|
| सुरेश भटांची कविता | लाभले अम्हास भाग्य बोलतो मराठी |
| सुरेश भटांची गझल | ते लोक होते वेगळे, घाईत जे गेले पुढे.. |
| सुरेश भटांची गझल | सुरेश भटांचे सूक्ष्म शेर |
जीवनाची सर्व पाने काय सोनेरीच होती ?
सारखी तेजाळणारी ओळ एखादीच होती !
| प्रकार | शीर्षक |
|---|---|
| सुरेश भटांची कविता | लाभले अम्हास भाग्य बोलतो मराठी |
| सुरेश भटांची गझल | ते लोक होते वेगळे, घाईत जे गेले पुढे.. |
| सुरेश भटांची गझल | सुरेश भटांचे सूक्ष्म शेर |