|
गझल |
सध्या! |
मधुघट |
|
गझल |
ठिपका |
अनिरुद्ध अभ्यंकर |
|
गझल |
कशाचा शोध काही घेत नसतो |
चित्तरंजन भट |
|
गझल |
या द्यूतामध्ये कितिदा.. |
गणेश धामोडकर |
|
गझल |
मी फुलांची मूक भाषा जाणतो..... |
खलिश |
|
गझल |
जगण्याला काय हवे..? |
मानस६ |
|
गझल |
सूर्य माझ्या मागुनी येणार होता |
कैलास गांधी |
|
गझल |
...स्मरशील तू ! |
प्रदीप कुलकर्णी |
|
गझल |
भ्रम..... |
अमित वाघ |
|
गझल |
फीतूर .... |
कविता मोकाशी |
|
गझल |
रात्र पुन्हा परीकथा रंगवेल |
प्रसाद लिमये |
|
गझल |
व्यासही माझ्यात...मी व्यासात आहे...! |
प्रदीप कुलकर्णी |
|
गझल |
तारा असण्याचा भरला सारा सारा मी |
बेफिकीर |
|
गझल |
आयुष्याला अमुच्या....... |
वैभव देशमुख |
|
गझल |
कसाबसा मी जगतो ते |
बेफिकीर |
|
गझल |
...त्याचीच ओढा री पुन्हा!! |
प्रदीप कुलकर्णी |
|
गझल |
अचाट तारे तोडत होता |
अनिल रत्नाकर |
|
गझल |
कुठे? |
भूषण कटककर |
|
गझल |
भक्तीविभोर....!! |
गंगाधर मुटे |
|
गझल |
येत नाही मी |
अनिल रत्नाकर |
|
गझल |
फास |
मधुघट |
|
गझल |
मी तुला अन तू मला मिरवायला हवे |
मिल्या |
|
गझल |
अतोनात तिटकारा येतो |
supriya.jadhav7 |
|
गझल |
हे सुगंधाचे निघाले काफिले! |
मानस६ |
|
गझल |
थांबवा हे जग |
जयन्ता५२ |