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गझल |
''श्वास झाला मोकळा की,कोंडल्यागत वाटते'' |
कैलास |
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गझल |
राहिले न आजकाल वाचण्यासारखे... |
अजय अनंत जोशी |
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गझल |
शोध ज्याचा घेतला तो..(अनुवाद) : केदार पाटणकर |
केदार पाटणकर |
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गझल |
कुणी न समजुन घेतला... |
जनार्दन केशव म्... |
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गझल |
चाहुलीची तुझ्या चमक... |
वैभव देशमुख |
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गझल |
धोका |
क्रान्ति |
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गझल |
...मी हासतो आहे |
मधुघट |
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गझल |
भिंती !! |
supriya.jadhav7 |
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गझल |
उदास खाली मनास घेऊन फिरतो आम्ही ... |
अमोल शिरसाट |
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गझल |
काय नभाची आहे इच्छा पाहू... |
वैभव देशमुख |
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गझल |
कोण आहे तुझा मी? |
ज्ञानेश. |
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गझल |
हरवलाच रुखवती उखाण्याचा गोडवा |
ह बा |
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गझल |
द्वैत जन्मातले सरे बंधो... |
अनंत ढवळे |
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गझल |
जन्म वाभरा |
वैभव वसंतराव कु... |
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गझल |
ग झ ल : रात्र थोडी गार होती ..... |
खलिश |
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गझल |
इतके धुळकट रस्ते इथले.... |
अनंत ढवळे |
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गझल |
वस्ती..! |
विसोबा खेचर |
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गझल |
लाघवीशी वाटते आहे |
भूषण कटककर |
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गझल |
पुन्हा |
क्रान्ति |
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गझल |
का? |
जयन्ता५२ |
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गझल |
कुंडलीने घात केला |
गंगाधर मुटे |
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गझल |
ब्लॅक होल |
अलखनिरंजन |
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गझल |
ज्वानी भरात आहे, मदमस्त रात आहे...! |
मानस६ |
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गझल |
शहर झाले चांदण्याचे |
चित्तरंजन भट |
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गझल |
जाणीव |
अजय अनंत जोशी |