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गझल |
तू |
जयश्री अंबासकर |
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गझल |
ग झ ल : रात्र थोडी गार होती ..... |
खलिश |
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गझल |
इतके धुळकट रस्ते इथले.... |
अनंत ढवळे |
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गझल |
वस्ती..! |
विसोबा खेचर |
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गझल |
लाघवीशी वाटते आहे |
भूषण कटककर |
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गझल |
पुन्हा |
क्रान्ति |
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गझल |
का? |
जयन्ता५२ |
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गझल |
कुंडलीने घात केला |
गंगाधर मुटे |
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गझल |
ब्लॅक होल |
अलखनिरंजन |
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गझल |
ज्वानी भरात आहे, मदमस्त रात आहे...! |
मानस६ |
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गझल |
शहर झाले चांदण्याचे |
चित्तरंजन भट |
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गझल |
जाणीव |
अजय अनंत जोशी |
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गझल |
लिहायचे ते लिहून टाकू |
बेफिकीर |
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गझल |
श्वास |
पुलस्ति |
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गझल |
कशाला नाचते पोरी? |
कमलाकर देसले |
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गझल |
केवढी आग लागली होती |
अनंत ढवळे |
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गझल |
चालला शब्दांतुनी... |
अजय अनंत जोशी |
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गझल |
मनसुबे |
पुलस्ति |
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गझल |
म्हणालो त्यातले काहीच मी करणार नाही |
विजय दि. पाटील |
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गझल |
घे हमी तू....... |
गौतमी |
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गझल |
काही वेळा..... |
बेफिकीर |
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गझल |
आता ! |
प्रदीप कुलकर्णी |
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गझल |
बत्तीस तारखेला |
गंगाधर मुटे |
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गझल |
नको ... |
अजय अनंत जोशी |
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गझल |
मी जसा आहे तसा.. |
ऋत्विक फाटक |