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गझल |
पत्रे |
केदार पाटणकर |
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गझल |
अढी कपाळावरील जेव्हा मनात गेली.. |
ज्ञानेश. |
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गझल |
...वेड पांघरावे मी ! |
प्रदीप कुलकर्णी |
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गझल |
कसे मानू तुला माझा... |
जनार्दन केशव म्... |
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गझल |
कळता कळता... |
ज्ञानेश. |
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गझल |
रेंगाळणे |
अनंत ढवळे |
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गझल |
फडफडतो काळजात माझ्या... |
वैभव देशमुख |
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गझल |
नियम |
कुमार जावडेकर |
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गझल |
एकटाच मी ! |
प्रदीप कुलकर्णी |
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गझल |
शब्दांमधुनी जगण्याशी |
प्रणव.प्रि.प्र |
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गझल |
काय हा रस्ता तुझ्या शहरातला |
बेफिकीर |
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गझल |
रिवाज पाळू... |
ज्ञानेश. |
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गझल |
दिसे दिसायास... |
वैभव देशमुख |
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गझल |
...मित्रा |
संतोष कुलकर्णी |
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गझल |
आपले म्हणून जा..कधीतरी |
मानस६ |
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गझल |
तू कधी ही न रागावली पाहिजे |
कैलास |
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गझल |
तुझ्याविना हे शहर तुझे |
वैभव जोशी |
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गझल |
सुखाच्या सर्व व्याख्यांना जरा बदलून पाहू या! |
बहर |
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गझल |
तुला समजलो ,कुठे समजली तुझी सहजता |
अनंत ढवळे |
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गझल |
चालतो ऐसा जणू .... |
ह बा |
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गझल |
कधीच नाही |
जयश्री अंबासकर |
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गझल |
अवेळी अशा.. |
ज्ञानेश. |
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गझल |
कुठे म्हणालो परी असावी |
प्रणव सदाशिव काळे |
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गझल |
जपलेली हळहळ |
ह बा |
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गझल |
हा जुगार |
केदार पाटणकर |