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गझल |
बघ तुझ्या येण्यामधे हे केवढे मांगल्य आहे |
विजय दि. पाटील |
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गझल |
जगणे असते... (अजब) |
अजब |
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गझल |
का....?(गझल) |
mamata.riyaj@gm... |
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गझल |
पांघरूनी वेड वावरणे बरे की |
बेफिकीर |
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गझल |
ओळख |
मधुघट |
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गझल |
ती मजा ना राहिली |
भूषण कटककर |
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गझल |
पराक्रमी असा मी |
गंगाधर मुटे |
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पृष्ठ |
बर्यापैकी |
विश्वस्त |
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गझल |
हास आयुष्या |
क्रान्ति |
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पृष्ठ |
समर्पण : डॉ. श्रीकृष्ण राऊत |
डॉ. श्रीकृष्ण राऊत |
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पृष्ठ |
वरात : डॉ. श्रीकृष्ण राऊत |
डॉ. श्रीकृष्ण राऊत |
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गझल |
म्हटले होते |
क्रान्ति |
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गझल |
नाही खचायाचे |
केदार पाटणकर |
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गझल |
'चुकलो' म्हणेन मी तर सोकावतील सारे |
चक्रपाणि |
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गझल |
सांग कसे ते कण्हतानाही गात असावे... |
जयदीप |
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गझल |
होतीस तू |
अनिल रत्नाकर |
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गझल |
शिक्षा |
क्रान्ति |
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गझल |
वारुळे |
अनिल रत्नाकर |
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गझल |
मी तुझा,तुझा असेन आमरण |
कैलास |
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गझल |
गलबत कुठे निघाले |
केदार पाटणकर |
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पृष्ठ |
तिलकधारी, गप्प हो! हझल |
भूषण कटककर |
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गझल |
सांगती खोटे जरी |
rind |
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गझल |
भावस्थंडिल |
सारंग भणगे |
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गझल |
येतात सोबती हे.. |
मधुघट |
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गझल |
झेलू |
अनिल रत्नाकर |